त़लाक़ की निय्यत से बीवी का इन अल्फ़ाज़ से इस्तिक़बाल किया तो त़लाक़-ए-बाइन हो जाती है
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
*🥀 त़लाक़ की निय्यत से बीवी का इन अल्फ़ाज़ से इस्तिक़बाल किया तो त़लाक़-ए-बाइन हो जाती है 🥀*
https://chat.whatsapp.com/ERGah4bKksUIHdlxfhJuBz
*✍️किनाया के बअ़्ज़ अल्फ़ाज़ ये हैं*
*(1) जा*
*(2) निकल*
*(3) चल*
*(4)रवाना हो*
*(5) उठ*
*(6) खड़ी हो*
*(7) पर्दा कर*
*(8) दुपट्टा ओढ़*
*(9) निक़ाब डाल*
*(10) हट सरक*
*(11) जगह छोड़*
*(12) घर ख़ाली कर*
*(13) दूर हो*
*(14) चल दूर*
*(15) ऐ ख़ाली*
*(16) ऐ बरी*
*(17) ऐ जुदा*
*(18) तू जुदा है*
*(19) तू मुझसे जुदा है*
*(20) मैंने तुझे बे क़ैद किया*
*(21) मैंने तुझसे मुफ़ारक़त की*
*(22) रस्ता नाप*
*(23) अपनी राह ले*
*(24) काला मुंह कर*
*(25) चाल दिखा*
*(26) चलती बन*
*(27) चलती नज़र आ*
*(28) दफ़अ़ हो*
*(29) दाल फ़े ए़न हो*
*(30) रफ़ूचक्कर हो*
*(31) पिन्जरा ख़ाली कर*
*(32) हट के सड़*
*(33) अपनी स़ूरत गुमा*
*(34) बिस्तर उठा*
*(35) अपना सूझता देख*
*(36) अपनी गठरी बांध*
*(37) अपनी निजासत अलग फैला*
*(38) तशरीफ़ ले जाइए*
*(39) तशरीफ़ का टोकरा ले जाइए*
*(40) जहाँ सींग समाए जा*
*(41) अपना माँग खा*
*(42) बहुत हो चुकी अब मेहरबानी फरमाएं*
*(43) ऐ बे इ़लाक़ा*
*(44) मुंह छुपा*
*(45) जहन्नम में जा*
*(46) चूल्हे में जा*
*(47) भाड़ में पड़*
*(48) मेरे पास से चल*
*(49) अपनी मुराद पर फ़तह़ मंद हो*
*(50) मैंने निकाह़ फ़स्ख़ किया*
*(51) तू मुझ पर मिस़्ले मुरदार*
*(52) या सुवरिया*
*(53) शराब के है (ना मिस़्ल बन्ग -या अफ़ीन या माले फ़ुलां या ज़ोज-ए- फ़ुलां के)*
*(54) तू मिस़्ले मेरी मां या बहन या बेटी के है (और यूँ कहा कि तू माँ बहन बेटी है तो गुनाह के सिवा कुछ नहीं )*
*(55) तू ख़लास़ है*
*(56) तेरी गुलू ख़लास़ी हुई*
*(57) तू ख़ालिस़ हुई*
*(58) ह़लाल ख़ुदा या*
*(59) ह़लाल मुसलमानान या*
*(60) हर ह़लाल मुझ पर ह़राम*
*(61)तू मेरे साथ ह़राम में है*
*(62) मैंने तुझे तेरे हाथ बेचा अगरचे किसी इ़वज़ का जि़क्र न आए अगरचे औ़रत ने ये न कहा कि मैंने ख़रीदा*
*(63) मैं तुझसे बाज़ आया*
*(64) मैं तुझसे दर गुज़रा*
*(65) तू मेरे काम की नहीं*
*(66) मेरे मत़लब की नहीं*
*(67) मेरे मस़रफ़ की नहीं*
*(68) मुझे तुझ पर कोई राह नहीं*
*(69) कुछ क़ाबू नहीं*
*(70) मिल्क नहीं*
*(71) मैंने तेरी राह ख़ाली कर दी*
*(72) तू मेरी मिल्क से निकल गई*
*(73) मैंने तुझसे ख़ुलअ़ किया*
*(74) अपने मायके बैठ*
*(75) तेरी बाग़ ढ़ीली की*
*(76) तेरी रस्सी छोड़ दी*
*(77) तेरी लगाम उतार ली*
*(78) अपने रफ़ीक़ों से जा मिल*
*(79) मुझे तुझ पर कोई इख़्तियार नहीं*
*(80) मैं तुझसे ला दअ़्वा होता हूँ*
*(81) मेरा तुझ पर कुछ दअ़्वा नहीं*
*(82) ख़ाविंद तलाश कर*
*(83) मैं तुझसे जुदा हूँ या हुआ (फ़क़त़ मैं जुदा हूँ या हुआ काफ़ी नहीं अगरचे ब निय्यते त़लाक़ कहा)*
*(84) मैंने तुझे जुदा कर दिया*
*(85) मैंने तुझसे जुदाई की*
*(86) तू ख़ुद मुख़्तार है*
*(87) तू आज़ाद है*
*(88) मुझ में तुझ में निकाह़ नहीं*
*(89) मुझ में तुझ में निकाह़ बाक़ी ना रहा*
*(90) मैंने तुझे तेरे घर वालों या*
*(91) बाप या*
*(92) माँ या*
*(93) ख़ाविदों को दिया या*
*(94) ख़ुद तुझको दिया (और तेरे भाई या मामू या चचा या किसी अजनबी को देना कहा तो कुछ नहीं)*
*(95) मुझ में तुझ मे कुछ मुअ़मला न रहा या नहीं*
*(96) मैं तेरे निकाह़ से बेज़ार हूँ*
*(97) बरी हूँ*
*(98) मुझसे दूर हो*
*(99) मुझे स़ूरत न दिखा*
*(100) किनारे हो*
*(101) तूने मुझ से निजात पाई*
*(102) अलग हो*
*(103) मैंने तेरा पाँव खोल दिया*
*(104) मैंने तुझे आज़ाद किया*
*(105) आज़ाद हो जा*
*(106) तेरी बंद कटी*
*(107) तू बे क़ैद है*
*(108) मैं तुझसे बरी हूँ*
*(109) अपना निकाह़ कर*
*(110) जिससे चाहे निकाह़ कर ले*
*(111) मैं तुझ से बेज़ार हुआ*
*(112)मेरे लिए तुझ पर निकाह़ नहीं*
*(113) मैंने तेरा निकाह़ फ़स्ख़ किया*
*(114) चारों राहें तुझ पर खोल दीं (और अगर यूँ कहा कि चारों राहें तुझ पर खुली हैं तो कुछ नहीं जब तक ये ना कहे कि*
*(115) जो रास्ता चाहे इख़्तियार कर)*
*(116) मैं तुझसे दस्त बरदार हुआ*
*(117) मैंने तुझे तेरे घर वालों या बाप या माँ को वापस दिया*
*(118) तू मेरी इ़स़्मत से निकल गई*
*(119) मैंने तेरी मिल्क से शरई़ त़ौर पर अपना नाम उतार दिया*
*(120) तू क़ियामत तक या उ़म्र भर मेरे लाइक़ नहीं*
*(121) तू मुझसे ऐसी दूर है जैसे मक्का मुअ़ज़मा मदीना त़य्यिबा से या दिल्ली लखनऊ से।*
*📚( माख़ूज़ मिन फ़तावा रज़विय्या शरीफ़ )*
*📚(बहारे शरीअ़त ह़िस़्स़ा 7 स़फ़्ह़ा 131से132)*
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें