नमाज़ में मर्द औरत के लिये फर्क किया है ?
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*🥀 नमाज़ में मर्द औरत के लिये फर्क किया है 🥀*
*मर्द के लिये हुकुम*
1:- अपना बाया लेफ्ट क़दम बिछा कर उस पर बैठे और दाया क़दम इस तरह खड़ा रखे कि तमाम उंगलियां किब्ला की तरफ हो
2 :- अपनी हथेलिया रान पर रखे और उंगलिया अपनी हालात पर छोड़ दे यानी उंगलिया न कशादा खुली रखे और न मिली हुई रखे
*✨औरत के लिये किया हुकुम*
1:- दोनो पाव दायीं तरफ निकाल दे और बाये सुरीन यानी चुतरा कुला-के बल जमीन पर बैठे
2 :- अपनी हथेलियां रान पर रखे और उंगलिया मिली हुई रखे
*🌸नमाज़ के आगे से गुजरने वाले को मुतनब्बे सचेत करना मर्द और औरत के लिये किया हुकुम ?*
*मर्द के लिये हुकुम*
1:- नमाज़ पढ़ रहा है और कोई शख्स आगे से गुजरे तो सुब्हानल्लाह कहे कर उस गुजरने वाले को मुतनब्बेह यानी सचेत करे
*✨औरत के लिये किया हुकुम*
1 :- नमाज़ पढ़ रही है और कोई व्यक्ति आगे से गुजरे तो हाथ पर हाथ मार कर मुतनब्बेह करे इस को शरइ इस्तेमाल में तस्फीक कहते है यानी औरत तस्फीक करे
नमाज़े फज्र में किया हुकुम मर्द और औरत के लिए
*मर्द के लिये हुकुम*
1 :- नमाज़े फ़ज्र में अस्कार तक ताखीर करना मुस्तहब है यानी इतना उजाला हो जाएकी जमीन रोशन हो जाए और आदमी एक दूसरे को आसानी से पहचान ले
*औरत के लिये किया हुकुम*
1 :- फज्र की नमाज़ गुलस यानी अव्व्ल वक़्त
अंधेरे में पढ़े
2 :- औरत फ़ज्र की नमाज़ मर्दो की जमाअत क़ाइम होने से पहले यानी उजाला फैलाने से पहले पढे बाकी तमाम नमाज़ों में मर्द की जमाअत का इन्तजार करे यानी मर्दो की जमाअत हो जाने के बाद पढे
*नमाज़े जुम्मा व ईदैन में मर्द औरत के लिये किया हुकुम*
*मर्द के लिये हुकुम*
1 :- मर्द पर जुमा की नमाज़ फज्र है और ईदैन कि नमाज़ वाजीब है
*नमाज़े जुम्मा व ईदैन औरत के लिये किया हुकुम*
1 :- औरत पर जुम्आ व ईदैन की नमाज़ नही
*(📚मोमिन की नमाज़)*
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