आखिर ज़माने में दीन का काम भी दरहमो दीनार से चलेगा

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*🥀 आखिर ज़माने में दीन का काम भी दरहमो दीनार से चलेगा 🥀*



*📝हदीस - हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि आखिर ज़माने में दीन का काम भी दरहमो दीनार से चलेगा* 

*📚(फतावा रज़वियह,जिल्द 12,सफह 133)*

*मसअला - जिसके पास 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चांदी या इसके बराबर की रकम पर साल गुज़र गई तो ज़कात फर्ज़ हो गई* 

*📚(फतावा आलमगीरी,जिल्द 1,सफह 168)*
 *मसलन आज 27 अप्रैल 2020 को चांदी 46100 रू किलो है यानि 52.5 तोला चांदी जो कि 653.184 ग्राम हुई उसकी कीमत 30,111 रू हुई,तो अगर आज यानि 3 रमज़ान को कोई इतने रूपये का मालिक है और अगले साल 2 रमज़ान को फिर उसके पास साहिबे निसाब की जो मिल्क बनती होगी उतनी रकम पाई जायेगी तो उस पर ज़कात फर्ज़ हो जायेगी,अगर चे वो पूरे साल फकीर रहा हो मतलब ये कि पूरे साल कभी उसके पास निसाब की बराबर रकम हो या ना हो मगर शुरुआत और इख़्तिताम पर अगर निसाब का मालिक हुआ तो ज़कात फर्ज़ हो गई,बाज़ लोग ये सवाल करते हैं कि उनके पास 7.5 तोला सोना नहीं है बल्कि 1 या 2 तोला सोना ही है तो क्या उनको भी ज़कात देनी होगी तो याद रखें कि अगर सिर्फ सोना रखा है और कैश कुछ नहीं है या चांदी ज़र्रा बराबर भी नहीं है और माले तिजारत भी कुछ नहीं है तब तो सोने का निसाब 7.5 तोला ही माना जायेगा यानि जब तक कि 7.5 तोला सोना नहीं होगा ज़कात फर्ज़ नहीं होगी लेकिन अगर सोना 0.5 तोला कुछ चाँदी कुछ कैश मौजूद है और सबका टोटल 52.5 तोला चांदी की कीमत बन रही है तो ज़कात फर्ज़ हो गई* 
*हाजते असलिया यानि रहने का घर,पहनने के कपड़े,किताबें,सफर के लिए सवारियां,घरेलु सामान पर ज़कात फर्ज़ नहीं है*  

*📚(फतावा आलमगीरी,जिल्द 1,सफह 160)*

*एसी-फ्रिज-बाईक-फोर व्हीलर ये सब हाजते असलिया में दाखिल हैं,उसी तरह किसी के पास कई मकान हैं और वो सब उसके खुद के रहने के लिए है तो ज़कात नहीं लेकिन अगर किसी मकान में किरायेदार को बसा दिया और उसका किराया इतना है कि ये साहिबे निसाब को पहुंच जाये तो किराये पर ज़कात फर्ज़ होगी,उसी तरह दुकान पर तो ज़कात नहीं है मगर उसमे भरे हुये माल की ज़कात है माल से मुराद फक़त बेचने और खरीदने का सामान है उसके काम करने का सामान नहीं मस्लन उसके औज़ार मशीनें फर्नीचर पर्सनल इस्तेमाल का सामान नहीं,लिहाज़ा सब एहतियात से जोड़कर ज़कात अदा करी जाये*

*मसअला - पालिसी या f.d अपने नाम है तो ज़कात फर्ज़ है लेकिन अपनी नाबालिग औलाद को देकर उनको मालिक बना दिया या उनके नाम से फिक्स किया तो ज़कात नहीं*  

*📚(बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 11)*



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