समझाना वाजिब हैं
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*🥀 समझाना वाजिब हैं 🥀*
➡आ़म ह़ालात में अगर्चे नेकी की दावत देना मुस्तह़ब हैं मगर कुछ सूरतों में येह वाजिब हो जाती हैं !
वाजिब होने की सूरत येह हैं कि जब कोई शख़्स गुनाह कर रहा हो और हमें यक़ीन हो की इस शख़्स को मना करेंगे तो येह मान जाएगा तो अब इस को बताना, समझाना, मना करना वाजिब हैं !
अब हम को ग़ौर करना चाहिये कि येह वाजिब कौन अदा कर रहा हैं ❓
➡प्यारे इस्लामी भाईयों, नेकी की बात बताने, गुनाहों से नफ़रत दिलाने और इन कामों के लिए किसी को समझाने का सवाब कमाने के लिए ज़रूरी नही कि जिस को समझाया वोह मान जाए तो ही सवाब मिलेगा, बल्कि अगर वोह न माने तब भी इन्शा अल्लाह तआ़ला सवाब ही सवाब हैं, हमारी थोड़ी सी मेहनत हमारे नामाए आमाल में नेकियों का अम्बार लगा सकती हैं, हमें हर वक़्त इ़ल्में दीन की जुस्तज़ू में रहना हैं क्यूंकि दीन का इ़ल्म ह़ासिल करना सब से बेहतरीन अ़मल हैं !
👉एक ह़दीस मुबारक में इ़ल्मे दीन ह़ासिल करने की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत बयान हुई हैं "
सरकारे दो आ़लम सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम एक सह़ाबी से गुफ़्तगू फ़रमा रहे थे कि वह़ी आई (पैग़ाम आया)
🌹येह शख़्स जो आप के साथ बात कर रहा हैं इस की उ़म्र सिर्फ़ एक साअ़त बाक़ी रह गई हैं"!
वोह अस्र का वक़्त था कि सरकारे मदीना सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम ने उस सह़ाबी को इस बात से आगाह फ़रमाया तो वोह बे क़रार हो गए और अ़र्ज़ किया
🌺या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम, मुझे ऐसा अ़मल बताइये जो इस वक़्त मेरे लिए ज़्यादा मुनासिब हो !
🌹हुज़ूर सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया
✨इ़ल्म ह़ासिल करने में मश्ग़ूल हो जाओ
तो वोह सह़ाबी रदीअल्लाहो तआ़ला अ़न्हो इ़ल्म ह़ासिल करने में मश्ग़ूल हो गए और मग़रिब से पहले इन्तिक़ाल फ़रमा गए !
रावी का कहना हैं कि अगर इ़ल्म से अफ़ज़ल कोई और चीज़ होती तो सरकार उस वक़्त में उसी के करने का हुक्म फ़रमाते !
*📚(तफ़्सीरे कबीर, जिल्द-1, सफ़ह़ा-410)*
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