इस्लाम में हमारी बहन बेटियों पर्दे व हिजाब का हुक्म क्यूं दिया गया

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*🥀 इस्लाम में हमारी बहन बेटियों पर्दे व हिजाब का हुक्म क्यूं दिया गया 🥀*



💍 क्योंकि औरत घर की दौलत है और दौलत को छुपा कर घर में रखा जाता है, हर एक को दिखाने से ख़तरा है कि कोई चोरी न कर ले! इसी तरह औरत को छुपाना और गैरों को न दिखाना ज़रूरी है!

🥀 औरत घर में ऐसी है जैसे चमन में फूल और फूल चमन में ही हरा भरा रहता है, अगर तोड़ कर बाहर लाया गया तो मुरझा जाएगा! इसी तरह औरत का चमन उस का घर उस के बाल बच्चे हैं, इस को बिला वजह बाहर न लाओ वरना मुरझा जाएगी। औरत का दिल निहायत नाजुक है बहुत जल्द हर तरह का असर क़बूल कर लेता है, इस लिये इस को कच्ची शीशियां फ़रमाया गया! हमारे यहां भी औरत को सिन्फे नाज़ुक कहते हैं और नाजुक चीज़ों को पथ्थरों से दूर रखते हैं कि टूट न जाएं गैरों की निगाहें इस के लिये न मज़बूत पथ्थर हैं, इस लिये इस को गैरों से बचाओ! 

💍 औरत अपने शौहर और अपने बाप दादा बल्कि सारे खानदान की इज्जत और आबरू है और इस की मिसाल सफेद कपड़े की सी है, सफ़ेद कपड़े पर मा'मूली सा दाग धब्बा दूर से चमकता है और गैरों की निगाहें इस के लिये एक बदनुमा दाग हैं, इस लिये इस को इन धब्बों से दूर रखो! औरत की सब से बड़ी तारीफ़ येह है कि उस की निगाह अपने शौहर के सिवा किसी पर न हो!

🔸एक हदीस पाक का मफ़हूम है औरत पर्दे में रखने की चीज़ है जब वह घर से बाहर निकलती है तो शैतान उसे घूरता है!_

*(📚 पेशकश सुन्नी सिराते मुस्तक़ीम ज़िल्द एक सफ़ह 3 )*



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