शहीद को शहीद किस लिए कहा जाता है 🥀*

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*🥀 शहीद को शहीद किस लिए कहा जाता है 🥀*



🌹शहीद का लफ्ज़ इस्लाम ही ने मुतारुफ करवाया और यह सिर्फ मुसलमानों ही के लिए मकसूस है 
शहीद की तारीफ अरबी ज़बान की मारूफ किताब अल अरब में यूं बयान हुई है -शहीद के मायने हैं अल्लाह की राह में कत्ल किया जाने वाला और शहीद को शहीद इसलिए कहा जाता है के अल्लाह और उसके रसूल और उसके फरिश्ते, उसके जन्नती होने की गवाही देते हैं और शहीद का मर्तबा यह है कि वह कयामत के रोज हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम के साथ मिलकर मौजूदा उम्मतों के अहवाल पर गवाह बनेंगे , 
शहीद वह है जो अल्लाह के लिए और उसके नाम की सर बुलंदी के लिए मैदाने जिहाद में मारा गया हो|
हदीस- रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम में शहीद के मायने एक ऐसे शख्स से हैं जो कुफ्फार के साथ जंग करके अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दे और अपने ईमान पर सच्चाई की मोहर लगा दे, शहीदों के लिए हदीस ए रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम में वाज़ेह तौर पर बयान हुआ है कि वह जन्नत के आला मकामात पर फाइज़ होंगे|

📍इमाम मालिक रहमतुल्लाह अलैह के नजदीक शहीद वह मुस्लिम है जो मुशरिकीन से जिहाद करते हुए मारा जाए|

✏️इमाम अहमद बिन हंबल के नजदीक शहीद की तारीफ यह है कि ऐसा मुसलमान जो दुश्मनों के हाथों लड़ाई में मारा जाए|

📝मुंदरजा बाला इकबाल व अहादीस की रोशनी में यह बात वाज़ेह होती है कि शहीद का लफ़्ज़ सिर्फ मुसलमान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, ग़ैर मुस्लिम या यहूद , मकतूल के लिए नहीं, शहीद के मफ़हूम में अहदीस नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वुसअत भी साबित हुई है। मसअला यह के जो कोई मुसलमान पेट की मर्ज में मर जाएं या मर्ज ताऊन में इंतिकाल कर जाए या फाकाकशी, प्यास,ग़रकानी, जिंदा दरगो, जहर खुवानी, या आसमानी बिजली गिरने के नतीजे में मर जाए वह भी शहीद के मफहूम में दाखिल है मगर जो मर्तबा मैदान ए जिहाद में मारे जाने वाले शहीद का है वह इन सब का नहीं  
इसी तरह कोई मुसलमान सफर ए हज में इंतकाल कर जाए या दयारे गैर में बेयारो मददगार मर जाए यह भी शहादत के जिमरे में है , मगर यहां भी इस्लाम शर्त है। 

💓और यह शहादत भी जिहाद फी सबीलिल्लाह वाली शहादत के बराबर नहीं । गोया मर्तबा शहादत पाने या शहीद कहने कहलाने के लिए जो शर्तें हैं उनमें से शर्त अव्वल मुसलमान होना है|

👑मुमकिन है कोई शख्स यह कहे कि क्योंकि 1886 ई0 के मजदूरों ने अपनी हुकूक के लिए जद्दोजहद की और अपने हक के लिए लड़ना जिहाद है और जिहाद में मारा जाने वाला शख्स शहीद हैं लिहाजा शिकागो में मरने वाले शहीद हुए, 
तो उसके जवाब में यह कहा जाएगा के अव्वल तो अपने हक के लिए जद्दोजहद करना भी इस्लाम ही में जिहाद कहलाएगा और गैर मुस्लिम का किसी भी मकसद के लिए लड़ना जिहाद नहीं और ना किसी गैर मुस्लिम का मारा जाना उसे शहादत के दर्जे पर फाइज़ कर सकता है क्योंकि उसका ताल्लुक सिर्फ इस्लाम से है नाकि हर कौम ओ मज़हब के लिए|



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