सेहरा पढ़ना
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*🥀 सेहरा पढ़ना 🥀*
✏️ऐसे अशआर पढ़ना जिनमें कोई खिलाफे शरह बात न हो तो वो मुबाह यानि जायज़ होता है युंही हर वो काम जो शरह में मना नहीं है वो भी जायज़ है सेहरा पढ़ने की दलील के लिए इतना ही काफी है,मगर फिर भी सुन लीजिए कि हुज़ूर मुफ्ति-ए आज़म हिन्द रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के निकाह के वक़्त सरकारे आलाहज़रत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के सामने शेर बेशये अहलेसुन्नत हज़रते अल्लामा शाह मुफ़्ती मुहम्मद हिदायत रसूल साहब रज़वी अलैहिर्रहमा ने अपना लिखा हुआ वो सेहरा पढ़ा था जिसको सुनकर सरकारे आलाहज़रत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु इस क़दर खुश हुए थे कि उन्होंने अपना इमामा मुबारक उतारकर शेर बेशये अहलेसुन्नत के सर पर सजा दिया था
*📚 तजल्लियाते शेख मुस्तफा रज़ा,सफह 102*
*🌹 महरमात* -
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि "हराम हुई तुम पर तुम्हारी मायें तुम्हारी बेटियां तुम्हारी बहने और फूफियां और खालायें और भतीजियां और भांजियां और तुम्हारी वो मायें जिन्होंने तुम्हे दूध पिलाया और दूध के रिश्तों की बहने और तुम्हारी औरतों की मायें" इन सबका हासिल ये है कि महरमात में से किसी से निकाह करना मआज़ अल्लाह ऐसा ही है जैसे अपनी मां बहन से निकाह करना,ज़िना खालिस हराम हराम हराम है जो जायज़ जाने काफिर है
*📚 सूरह निसा,आयत 23*
*📚 बहारे शरीयत,हिस्सा 7,सफह 19*
*💓 इद्दत की तफसील* -
अगर शौहर से क़ुरबत नहीं हुई तो इद्दत कुछ नहीं
अगर क़ुरबत हो चुकी मगर हमल से नहीं है तो इद्दत 3 हैज़ है
अगर लड़की हामिला है तो बच्चे की डिलीवरी तक,मतलब अगर तलाक़ के एक हफ्ते बाद ही बच्चा हो जाये तो इद्दत पूरी हो गयी
अगर शौहर का इंतेकाल हो गया तो इद्दत 4 महिना 10 दिन
*📚 अहकामे शरीयत,हिस्सा 2,सफह 167*
*📚 फतावा मुस्तफवियह,सफह 376*
*📚 फतावा अफज़लुल मदारिस,हिस्सा 1,सफह 108*
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