मां अगर काफ़िरा है तो हुस्ने सुलूक करना क्या है

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*🥀 मां अगर काफ़िरा है तो हुस्ने सुलूक करना क्या है 🥀*



*📌 मां अगर काफ़िरा है तो भी हुस्ने सुलूक वाजिब है*
*हज़रत अस्मा बिन्ते अबू बक्र सिद्दीके कबर रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हुजूर पुर नूर मुस्तफ़ा करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम के अहदे पाक में मेरी मुशरिका (काफ़िरा) मां मेरे पास आई तो मैंने महबूबे ख़ुदा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम से अर्ज किया कि मेरी बे दीन (काफ़िरा) मां आई हैं मैं उनके साथ किया सुलूक करूँ तो आका करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया अच्छा सुलूक करो।* 

*🌺 हज़रात इस हदीस शरीफ़ से साफ़ तौर पर पता चला कि मां बाप अगरचेह काफ़िरो काफ़िरा, मुश्रिको मुश्रिका भी हों तो औलाद पर फिर भी उन की इताअत व खिदमत फ़र्ज़ है तो मोमिन व मोमिना बाप और मां का खयाल रखना और उन की इताअत व खिदमत का हर तरह से खयाल रखना हम पर किस कदर लाजिम व जरूरी होगा।*

*🌺 मां की दुआ से गुनाह मुआफ़ होते हैं हदीस शरीफ़ रिवायत है कि एक शख्स ने आका करीम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम की बारगाहे करम में अर्ज किया कि मैंने बहुत बड़ा गुनाह किया है क्या मेरे लिये तौबह है तो आका करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया तेरी मां है (तो उस शख्स ने) अर्ज की नहीं फिर आका करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया तेरी खाला है तो उस शख्स ने अर्ज की हां फ़रमाया जाओ और खाला के साथ हुस्ने सुलूक करो।*

*✨ हज़रात इस हदीस शरीफ़ से साफ़-साफ़ जाहिर है कि कितना बड़ा गुनाह क्यूँ न हो मां की दुआ से और मां नहीं है तो मां की बहन ख़ाला की दुआ से मुआफ़ हो जाता है अल्लाह तआला हम को मां की दुआ के साथ खाला की भी दुआ लेने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए आमीन सुम्मा आमीन ।*

  *🥀 मां बाप के दोस्तों के साथ हुस्ने सुलूक हदीस शरीफ़ एक अन्सारी सहाबी रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु ने आक़ा करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम की खिदमते अक़द्दस में अर्ज़ किया कि मां - बाप के इन्तिकाल के बाद कोई तरीका है कि उन के साथ नेकी और भलाई किया करूँ तो आका करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया हां चार बातें हैं*
*(1) 👉 उन पर नमाज़े जनाजा पढ़ना*
*(2) 👉 और उन के लिये दुआए मग़ाफ़िरत करना*
*(3) 👉 और उनकी वसियत को पूरी करना*
*(4) 👉 और उनके दोस्तों की इज्जत करना और उनके साथ भलाई करना।*

*🌺 और फ़रमाया बेशक सब से बड़ी नेकी और हुस्ने सुलूक बाप के साथ यह है कि बाप के न होने पर उसके दोस्तों के साथ भलाई करे और उन से रिश्ता जोड़े रखे।*

  *👉 बाप के दोस्त की अहमियत हदीस शरीफ़ हज़रत इब्ने उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि महबूबे खुदा मुस्तफ़ा जाने रहमतसल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया तुम्हारे बाप ने जिस के साथ दोस्ती की तुम अपने बाप के उस दोस्ती की हिफाजत करो और उसे काट न दो कि अल्लाह तआला तेरा नूर बुझा देगा।*

*📚 (अनवारुल बयान जिल्द 2 सफ़ह 101,102)*

 *✏️ लेकिन अगर किसी के मां-बाप वहाबी, देवबंदी, तबलीगी, अहले हदीस, कादयानी, राफज़ी, या और जितने भी बातिल फिरक़े है उनमें से हों तब अपने मां बाप के साथ हुस्ने सुलूक या ताज़िम करना हराम है*



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