तिलावते कुरआन की फ़ज़ीलत

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*🥀 तिलावते कुरआन की फ़ज़ीलत 🥀*



✏️ ह़ज़रते अ़ब्दुल्लाह इब्ने अ़म्र रदीअल्लाहो तआ़ला अ़न्हो रिवायत करते हैं कि हुज़ूर पुरनूर सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम ने फ़रमाया कि
कुरआन वाले से कहा जाएगा 
*[1] पढ़़ और चढ़*
*[2] और यूं ही आहिस्तगी से तिलावत कर जैसे दुनिया में करता था*
*[3] आज तेरा ठिकाना व मक़ाम वहां हैं जहां तू आख़िरी आयत पढ़े* 

*📚(मिश्कातुल मसाबीह़, जिल्द-1, सफ़ह़ा-402, ह़दीस-2134)*

     *ह़दीस खुलासा*
✏️[1] कुरआन वाले से मुराद वो मुसलमान हैं जो हमेशा तिलावत करता हो और इस पर आ़मिल हो, वो शख़्स नही कि जो कुरआन पढ़ता हो और कुरआन उस पर लानत करता हो कि ये तिलावत तो अ़ज़ाबे इलाही का बाइ़स हैं, कुछ आर्या और ई़साई भी कुरआने पाक पर एतिराज़ात करने के लिए कुरआने पाक पढ़ते बल्कि ह़िफ़्ज़ तक कर लेते हैं, पण्डित काली चरन चौदह पारों का ह़ाफ़िज़ हुआ !

📍[2] जन्नत के दरजे ऊपर तले हैं जिस क़दर दरजे की बुलन्दी उसी क़दर बेहतर, इन्शा अल्लाह तआ़ला उस दिन तिलावते कुरआन मोमिन के लिए परों का काम देगी या इस से मरातिबे कुर्बे इलाही में तरक़्क़ी करना मुराद हैं यानी तिलावत करता जा और मुझसे क़रीब तर होता जा !


✏️[3] यानी जहां तेरा पढ़ना ख़त्म वहां तेरा चढ़ना ख़त्म, वहां इसी क़दर तिलावत कर सकेगा जिस क़दर दुनिया में तिलावत करता था और जिस त़रह़ आहिस्ता या जल्दी यहां तिलावत करता था इसी त़रह़ वहां करेगा ! इस से चन्द मसाइल मालूम हुए, एक ये कि जन्नत के छ हज़ार छ सौ छियासठ दरजे हैं क्यूंकि कुरआन मजीद की आयात इतनी ही हैं और हर आयत पर एक दरजा मिलता हैं, अगर दरजे इससे कम हो तो ये हिसाब कैसे दुरुस्त हो, और हर दो दरजों के दरमियान इतना फ़ासला हैं जितना ज़मीन व आसमान के दरमियान !

*📚(मिरकात)*

📍दुसरा ये कि जन्नत में कोई इ़बादत न होगी सिवाए तिलावते कुरआन के, मगर ये तिलावत लज़्ज़त और तरक़्क़ीए दरजात के लिए होगी जैसे फ़िरिश्तों की तस्बीह़ !
तीसरे ये कि दुनिया में तिलावते कुरआन का आदी मौत के बाद इन्शा अल्लाह तआ़ला ह़ाफ़िज़े कुरआन हो जाएगा वरना ये शख़्स वहां बग़ैर देखे सारा कुरआन कैसे पढ़ेगा !
चौथे ये कि बग़ैर तरजमा समझे भी तिलावत बहुत मुफ़ीद हैं कि यहां तिलावत को मुत़्लक़ रखा गया, यहां मिरकात ने फ़रमाया कि कुरआन में तफ़क्कुर करना महज़ तिलावत से अफ़ज़ल हैं इसीलिए सिद्दीके अकबर रदीअल्लाहो तआ़ला अ़न्हो ह़ुफ़्फ़ाज़ सह़ाबा से अफ़ज़ल हुए और जन्नत में सारी उम्मत से ऊंचे दरजे में वो ही होंगे !

*📚(मिरआतुल मनाज़ीह, जिल्द-3, सफ़ह़ा-336)*
*📚(अह़ादीसे मुबारका के अन्वार, सफ़ह़ा-40,41)*



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